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कोरी फील्ड्स ने चोरी रोकने के लिए बिटकॉइन “क्वांटम लैंडमाइन्स” का प्रस्ताव दिया

कोरी फील्ड्स ने चोरी रोकने के लिए बिटकॉइन “क्वांटम लैंडमाइन्स” का प्रस्ताव दिया

मुख्य बिंदु

  • कोरी फील्ड्स ने 4 नवंबर को क्वांटम लैंडमाइन्स का प्रस्ताव दिया, जिसके तहत संवेदनशील कॉइन स्थानांतरित करने के लिए उतनी ही राशि की जमानत जमा करनी होगी;
  • मालिक प्रतीक्षा अवधि के दौरान कॉइन वापस पाने और चोर की जमा राशि ज़ब्त करने के लिए छिपे हुए प्रमाण पेश कर सकते हैं;
  • वैध धारकों को भी इसी जमानत नियम का सामना करना पड़ेगा, जबकि खोई हुई चाबियाँ और निष्क्रिय कॉइन अनसुलझी चुनौतियाँ हैं।

क्वांटम युग में चोरी रोकने का एक प्रस्तावित उपाय

बिटकॉइन कोर डेवलपर कोरी फील्ड्स ने “क्वांटम लैंडमाइन्स” का प्रस्ताव दिया है—एक ऐसा तंत्र जिसका उद्देश्य क्वांटम हमलों के प्रति संवेदनशील बिटकॉइन चुराना हमलावर के लिए महँगा बनाना है। उन्होंने 4 नवंबर को बिटकॉइन डेवलपमेंट मेलिंग लिस्ट में यह विचार पेश किया। इसकी वजह Q-Day कहे जाने वाले भविष्य के उस समय को लेकर बढ़ती चिंता है, जब शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर बिटकॉइन की मौजूदा क्रिप्टोग्राफी को तोड़ सकते हैं। यह प्रस्ताव एक सुझाया गया उपाय है, अभी लागू बदलाव नहीं।

इस अवधारणा का आधार क्वांटम हमले संभव होने से पहले तैयार किया गया स्वामित्व का एक छिपा हुआ प्रमाण है। स्रोत में उदाहरण दिया गया है कि पुराने, संवेदनशील वॉलेट में 1 BTC रखने वाला मालिक एक छोटे, क्वांटम-सुरक्षित बिटकॉइन आउटपुट में गुप्त प्रमाण रखता है। यह प्रमाण सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देता। इसका उद्देश्य यह होगा कि अगर कोई संवेदनशील कॉइन स्थानांतरित करने की कोशिश करे, तो मालिक बाद में अपना दावा साबित कर सके।

प्रस्तावित नियमों के तहत, क्वांटम हमले संभव हो जाने के बाद असुरक्षित बिटकॉइन को स्थानांतरित करने के लिए खर्च करने वाले को उतनी ही राशि जमानत के रूप में देनी होगी। उदाहरण में, 1 असुरक्षित BTC खर्च करने के लिए जमानत के तौर पर 1 BTC और देना होगा। इसके बाद दोनों राशियों पर प्रतीक्षा अवधि लागू होगी, जो 30 दिनों तक हो सकती है। इससे वास्तविक मालिक को जवाब देने का समय मिलेगा, बजाय इसके कि हस्तांतरण तुरंत पूरा हो जाए।

जमानत की व्यवस्था कैसे काम करेगी

अगर कोई क्वांटम हमलावर कॉइन चुराने की कोशिश करता, तो मालिक प्रतीक्षा अवधि के दौरान गुप्त प्रमाण उजागर करके मूल बिटकॉइन वापस पा सकता और हमलावर की जमा राशि पर दावा कर सकता। यही नतीजा इस प्रस्ताव का निवारक है: चोरी की कोशिश से हमलावर को नुकसान हो सकता है, जबकि मालिक कॉइन और उतनी ही जमानत वापस पा सकता है। फ़ील्ड्स का तर्क है कि छिपी हुई सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता संभावित चोरों को कॉइन निशाना बनाने से हतोत्साहित कर सकती है।

इस व्यवस्था का मूल तर्क यह है कि संभावित हमलावर की धनराशि को उन असुरक्षित कॉइन के साथ जोखिम में डाला जाए जिन्हें वह स्थानांतरित करना चाहता है। छिपा हुआ प्रमाण चोरी की कोशिश को पूरी तरह रोक नहीं पाएगा; इसके बजाय, स्थानांतरण शुरू होने के बाद यह मालिक को उसे चुनौती देने का तरीका देगा। इसलिए जमानत की शर्त और देरी इस विचार के केंद्र में हैं, जबकि प्रमाण कॉइन वापस पाने और जमा राशि जब्त करने का आधार देता है।

यह प्रस्ताव इस बात पर भी निर्भर करता है कि मालिक Q-Day से पहले कार्रवाई करें और प्रमाण पहले से तैयार रखें। अगर किसी ने लैंडमाइन नहीं बनाई है, तो उन कॉइन के लिए बताई गई सुरक्षा उपलब्ध नहीं होगी। दिए गए विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि तैयारी कितनी व्यापक होगी, नियम कैसे लागू किए जाएंगे, या प्रमाण और प्रतीक्षा अवधि की रूपरेखा से आगे विवादित दावों का निपटारा कैसे होगा। उपलब्ध विवरण में ये बातें अभी अनसुलझी हैं।

वैध मालिकों पर बोझ

सबसे सीधा नुकसान यह है कि Bitcoin का ब्लॉकचेन क्वांटम हैकर और जोखिम वाले कॉइन स्थानांतरित करने वाले वैध मालिक के बीच अंतर नहीं कर सकता। नतीजतन, दोनों पर कोलैटरल की समान शर्त लागू होगी। पुराने वॉलेट से 10 BTC स्थानांतरित करने के इच्छुक धारक को क्वांटम-सुरक्षित फंड में भी 10 BTC रखने की ज़रूरत पड़ सकती है। इससे मौजूदा बचत तक पहुँच इस बात पर निर्भर हो जाएगी कि अतिरिक्त कोलैटरल के रूप में उतनी ही राशि उपलब्ध है या नहीं।

इससे चोरी को रोकने और ईमानदार मालिकों की व्यावहारिक पहुँच बनाए रखने के बीच तनाव पैदा होता है। यह नियम असुरक्षित कॉइनों पर हमला करने की लागत बढ़ा सकता है, लेकिन तब भी लागू होगा जब उन्हें स्थानांतरित करने वाला व्यक्ति उनका वैध मालिक हो। खास तौर पर, समान मूल्य का संपार्श्विक उन धारकों के लिए बड़ी बाधा बन सकता है जिनके पास अतिरिक्त क्वांटम-सुरक्षित बिटकॉइन उपलब्ध नहीं हैं। स्रोत इस बोझ की पहचान करता है, लेकिन वैध हस्तांतरणों के लिए इससे छूट देने का कोई तरीका नहीं बताता।

प्रतीक्षा अवधि से मालिक को प्रमाण प्रस्तुत करने का समय मिल सकता है, लेकिन इस प्रक्रिया के लिए भी मालिक को वह प्रमाण पहले से तैयार रखना होगा और उसका उपयोग कर सकना होगा। विवरण यह नहीं बताता कि दावे परस्पर विरोधी होने पर विवादों का समाधान कैसे किया जाएगा, या यदि मालिक तय समय-सीमा में जवाब नहीं दे पाता तो क्या होगा। ये अनुत्तरित प्रश्न महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि प्रस्ताव में वैध दावा स्थापित होने से पहले असुरक्षित कॉइनों के हर हस्तांतरण को एक जैसा माना गया है।

निष्क्रिय कॉइन और अनसुलझे विकल्प

निष्क्रिय कॉइन एक अलग चुनौती पेश करते हैं। यदि निजी कुंजियाँ खो गई हैं, तो उनके मालिक लैंडमाइन तैयार नहीं कर सकते; इसलिए इन होल्डिंग्स के लिए प्रस्तावित सुरक्षा को बस सक्रिय नहीं किया जा सकता। स्रोत व्यापक समस्या के उदाहरण के रूप में सातोशी-युग के कॉइनों का उल्लेख करता है: जो कॉइन स्थानांतरित नहीं होते, वे जोखिम में पड़ सकते हैं, लेकिन हो सकता है कि कोई ऐसा मालिक उपलब्ध न हो जिससे संपर्क किया जा सके, जो दावा साबित कर सके या क्वांटम हमलावर के कार्रवाई करने पर उन्हें वापस पा सके।

फ़ील्ड्स ने उन मामलों के लिए वैकल्पिक नीलामी तंत्र सुझाए हैं जिनमें कुंजी धारक लैंडमाइन तैयार नहीं कर सकता। बताए गए रूपों में बोली लगाने वाले हैकरों को चुनौती दे सकते हैं और अपनी जमा राशि पर दावा करने की कोशिश कर सकते हैं। एक संभावित डिज़ाइन में असुरक्षित कॉइनों को स्थायी रूप से नष्ट कर दिया जाएगा। इससे सवाल किसी पहचाने जा सकने वाले मालिक की सुरक्षा से हटकर इस निर्णय पर आ जाता है कि जब स्वामित्व साबित न किया जा सके तो क्या होना चाहिए। स्रोत इन तंत्रों को प्रस्तावों के रूप में प्रस्तुत करता है, न कि तयशुदा नीति के रूप में।

कमज़ोर सिक्कों को नष्ट करने से स्वामित्व और Bitcoin की कुल आपूर्ति पर भी सवाल उठेंगे, जबकि उन्हें जस का तस छोड़ने पर कुछ सिक्कों के पास व्यावहारिक बचाव नहीं होगा। स्रोत में इस विकल्प का समाधान कैसे किया जाए, इस पर कोई सहमति नहीं बताई गई है। यह भी तय नहीं है कि जमानत व्यवस्था या नीलामी के विकल्प अपनाए जाएंगे या नहीं। फिलहाल, यह प्रस्ताव एक समझौते की ओर इशारा करता है: भविष्य में क्वांटम चोरी के खिलाफ़ मज़बूत बचाव से पुराने सिक्कों को उनके वैध धारकों के लिए खर्च करना अधिक कठिन या महँगा हो सकता है।

स्रोत: BeInCrypto

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